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सावन शिव और श्रृष्टि आज संवाद और आज पहला सावन सोमवार ओंकारेश्वर अब पूरे रैंप खोले, 1 घंटे में 10 हजार लोग दर्शन करेंगे
नर्मदापुरम, सोमवार 14 जुलाई , 2025, श्रावण कृष्ण पक्ष – 4 2082
आज पहला सावन सोमवार
ओंकारेश्वर अब पुरे रैंप खोले 1 घंटे में 10 हजार लोग दर्शन करेंगे
खंडवा:- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन के लिए सभी रैंप खोल दिए गए हैं। इससे । घंटे में करीब 10 हजार श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। पहले सोमवार को ओंकार महाराज की महासवारी निकाली जाएगी।
*उज्जैन में महाकालेश्वर 100 किलो चांदी की पालकी में प्रजा का हाल जानने निकलेंगे।
काम की बात
पुराने व झूला पुल से सीधे रैंप पहुंचेंगे
* नई व्यवस्था के तहत अब जेपी चौक से पुराने पुल और झुला पुल दोनों ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को रैंप के जरिए मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है।
*मंदिर में जहां रैंप खत्म होगा वहां एक नहीं, 3 तरफ से ओंकारेश्वर भगवान के दर्शन कराए जाएंगे।
ओंकारेश्वर के दुर्लभ दर्शन
ओंकारेश्वर मंदिरों के खास दर्शन
ओंकारेश्वर मांधाता नर्मदा नदी के मध्य द्वीप पर स्थित है। दक्षिणी तट पर ममलेश्वर (प्राचीन नाम अमरेश्वर) मंदिर स्थित है । ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। इन दोनों शिवलिंगों को एक ही ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
खंडवा से 75 कि.मी. इंदौर-खंडवा हाईवे पर । यह हिंदुओं का एक पवित्र स्थान है। ओंकार ममलेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और जैन संप्रदाय के सिद्धवरकूट इस स्थान पर स्थित हैं।
दोनों संप्रदायों और विदेशियों के लाखों श्रद्धालु हर साल आते हैं। अद्वैत के प्रणेता आदिगुरु शंकराचार्य के गुरू गोविन्द जी की गुफा, सिद्धनाथ के भव्य मंदिर के भग्नावशेष, गौरी सोमनाथ का मंदिर, ऋणमुक्तेश्वर मंदिर इस स्थान पर स्थित हैं। द्वीप के प्रणकाक्षर “ॐ” के आकार के कारण ही इस स्थान का नाम ओंकारेश्वर है ।
जैन धर्म का तीर्थ सिद्धवरकूट भी नजदीक ही स्थित है । यहॉं पर जैन धर्म के कईं प्राचीन मंदिर हैं इनमे से कुछ का नवीनीकरण किया गया है । यहॉं की चित्रावलियों से प्रतीत होता है कि लगभग 1488 ई0 के आसपास की हैं । चित्रों में प्रमुखत: तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ जी का वर्णन है ।
भगवान शिव! नाम सुनते ही दिमाग में आता है, त्रिनेत्र, डमरू, और वो भयंकर, पर साथ ही प्यारा सा रूप! वो हैं महादेव, आदिदेव, योगीराज, हर किसी के दिलों में बसने वाले! शिव जी की कहानियाँ तो अनगिनत हैं, हर एक कहानी में कुछ नया सीखने को मिलता है। कभी वो पार्वती जी के साथ रोमांटिक मूड में, कभी तांडव करते हुए संसार का नाश करते हुए, और कभी योग में लीन!
एक ही शख्सियत में इतनी विविधता!
ध्यान में लीन, भांग पीते हुए, और अपने जानवरों के साथ मस्ती करते हुए! लेकिन जब बात आती है धर्म की रक्षा करने की, या अधर्म का नाश करने की, तो वो बिग बी बन जाते हैं!
उनकी कहानियाँ, उनकी लीलाएँ, सब कुछ इतना गहरा और रहस्यमयी है। जैसे, कैसे उन्होंने समुद्र मंथन से निकले विष को पीकर संसार को बचाया था!
या फिर कैसे उन्होंने अपने तप से देवताओं को राक्षसों से बचाया था! ये सब कहानियाँ हमें जीवन के कई सारे सबक सिखाती हैं। जैसे, न्याय, त्याग, और प्रेम। और भूल ही गए, शिव जी के भक्तों की बात! हर कोई शिव शंकर का दीवाना है! उनके भक्तों में से कुछ तो ऐसे हैं, जो अपनी पूरी ज़िन्दगी शिव जी की भक्ति में लगा देते हैं।
और ये भक्ति ही तो है, जो हमें शिव जी से जोड़ती है। अंत में, ये कहना चाहूँगा कि शिव जी की महिमा का वर्णन शब्दों में करना नामुमकिन है। वो हैं अद्भुत, अनोखे, और हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे!
भगवान शिव, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं, जिन्हें महादेव, शंकर, भोलेनाथ, आदि कई नामों से जाना जाता है। वे त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, और शिव) के तीसरे देवता हैं, जो क्रमशः सृजन, पालन और विनाश के प्रतीक हैं। हालांकि, शिव केवल विनाश के देवता नहीं हैं, बल्कि वे परिवर्तन और पुनर्जन्म के भी प्रतीक हैं। वे योग, ध्यान और मोक्ष के देवता भी हैं। शिव का स्वरूप: शिव का स्वरूप अत्यंत जटिल और बहुआयामी है।
उन्हें अक्सर नीले गले वाले, तीसरी आँख वाले, जटाओं में सजे, और भस्म से शरीर को रँगे हुए दिखाया जाता है। वे कभी-कभी नंदी नामक बैल पर सवार दिखाई देते हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, डमरू, और कमंडल जैसे विभिन्न प्रतीक होते हैं। त्रिशूल विनाश, डमरू सृजन, और कमंडल ज्ञान का प्रतीक है। शिव के विभिन्न रूप: शिव के कई रूप हैं, जिनमें से प्रत्येक उनके विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करता है।
उदाहरण के लिए, अर्धनारीश्वर रूप में वे शक्ति (पार्वती) के साथ एकता का प्रतीक हैं। भैरव रूप में वे भयानक और क्रूर हैं, जबकि अन्य रूपों में वे दयालु और करुणामय हैं। शिव और पार्वती: पार्वती, शिव की पत्नी हैं, जो शक्ति और प्रेम की देवी हैं। उनकी कहानी प्रेम, त्याग, और आध्यात्मिक विकास की एक कथा है। उनके पुत्र गणेश और कार्तिकेय भी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण देवता हैं। शिव पूजा: शिव की पूजा विभिन्न तरीकों से की जाती है।
भक्त उन्हें फूल, फल, दूध, और जल चढ़ाते हैं। शिवलिंग, शिव का एक प्रतीकात्मक रूप, पूजा का केंद्र बिंदु है। महाशिवरात्रि, शिव का एक प्रमुख त्योहार है, जो उनके सम्मान में मनाया जाता है। शिव का महत्व: शिव का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। वे न केवल एक देवता हैं, बल्कि वे एक आदर्श भी हैं।
वे हमें जीवन के परिवर्तनों को स्वीकार करने, योग और ध्यान के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने, और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का मार्ग दिखाते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि विनाश आवश्यक है, ताकि नया निर्माण हो सके। उनका जीवन और दर्शन आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं।
भगवान शिव: विनाश और सृजन के अधिपति हिन्दू धर्म में, भगवान शिव सर्वोच्च देवताओं में से एक हैं, जिन्हें विनाश और सृजन दोनों का अधिपति माना जाता है। वे त्रिमूर्ति के एक भाग हैं, जहाँ ब्रह्मा सृजन, विष्णु पालन और शिव विनाश के देवता हैं। परन्तु, शिव केवल विनाश के देवता नहीं हैं; वे योग, ध्यान और मोक्ष के भी प्रतीक हैं।
शिव का स्वरूप: शिव का स्वरूप अत्यंत जटिल और बहुआयामी है। उन्हें विभिन्न रूपों में चित्रित किया जाता है, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं: महादेव: यह उनका सबसे प्रसिद्ध नाम है, जिसका अर्थ है ‘महान देवता’। अर्धनारीश्वर: यह शिव का अर्धांगिनी पार्वती के साथ एक रूप है, जो लिंग और स्त्रीत्व के मिलन का प्रतीक है। भैरव: यह शिव का क्रोधी और भयानक रूप है, जो विनाश के प्रतीक के रूप में दिखाई देता है। नाटराज: यह शिव का नृत्य करते हुए रूप है, जो ब्रह्मांड के चक्रीय प्रकृति का प्रतीक है।
शिव के प्रतीक: शिव के कई प्रतीक हैं जो उनके विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं: त्रिशूल: यह शिव का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो सृजन, पालन और विनाश का प्रतीक है। डमरू: यह शिव का एक वाद्य यंत्र है, जो ब्रह्मांड की ध्वनि का प्रतीक है। चंद्रमा: यह शिव के माथे पर विराजमान है, जो शांति और शीतलता का प्रतीक है। नाग: यह शिव के गले में लिपटा रहता है, जो शक्ति और रहस्य का प्रतीक है। शिव का महत्व: शिव का हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्व है।
उन्हें भक्तों द्वारा विभिन्न रूपों में पूजा जाता है, और उनके कई मंदिर भारत भर में स्थित हैं। शिव की पूजा केवल भक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास और मोक्ष प्राप्ति के लिए भी की जाती है। शिव योगियों और साधकों के आदर्श देवता हैं, जो जीवन के रहस्यों को समझने और आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने का मार्ग दिखाते हैं।
शिव की कहानियाँ: शिव की कई कहानियाँ और किंवदंतियों में उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। उनकी कहानियाँ रोमांच, रहस्य और आध्यात्मिक ज्ञान से भरपूर हैं, जो हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। उनकी पार्वती के साथ प्रेम कहानी भी अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरणादायक है। शिव एक रहस्यमय और जटिल देवता हैं, जिनका अध्ययन जीवन भर चल सकता है। उनके विभिन्न रूपों और प्रतीकों का अध्ययन हमें आध्यात्मिकता और जीवन के रहस्यों को समझने में मदद करता है।
भगवान शिव! नाम सुनते ही दिमाग में आता है, त्रिनेत्र, डमरू, और वो भयंकर, पर साथ ही प्यारा सा रूप! वो हैं महादेव, आदिदेव, योगीराज, हर किसी के दिलों में बसने वाले! शिव जी की कहानियाँ तो अनगिनत हैं, हर एक कहानी में कुछ नया सीखने को मिलता है। कभी वो पार्वती जी के साथ रोमांटिक मूड में, कभी तांडव करते हुए संसार का नाश करते हुए, और कभी योग में लीन! एक ही शख्सियत में इतनी विविधता! लगता है, वो खुद ही एक meme template हैं! कभी-कभी लगता है कि शिव जी सबसे chill देवता हैं।
ध्यान में लीन, भांग पीते हुए, और अपने जानवरों के साथ मस्ती करते हुए! लेकिन जब बात आती है धर्म की रक्षा करने की, या अधर्म का नाश करने की, तो वो बिग बी बन जाते हैं! उनकी कहानियाँ, उनकी लीलाएँ, सब कुछ इतना गहरा और रहस्यमयी है। जैसे, कैसे उन्होंने समुद्र मंथन से निकले विष को पीकर संसार को बचाया था!
या फिर कैसे उन्होंने अपने तप से देवताओं को राक्षसों से बचाया था! ये सब कहानियाँ हमें जीवन के कई सारे सबक सिखाती हैं।
जैसे, न्याय, त्याग, और प्रेम। और भूल ही गए, शिव जी के भक्तों की बात! हर कोई शिव शंकर का दीवाना है! उनके भक्तों में से कुछ तो ऐसे हैं, जो अपनी पूरी ज़िन्दगी शिव जी की भक्ति में लगा देते हैं।
और ये भक्ति ही तो है, जो हमें शिव जी से जोड़ती है। अंत में, ये कहना चाहूँगा कि शिव जी की महिमा का वर्णन शब्दों में करना नामुमकिन है। वो हैं अद्भुत, अनोखे, और हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे!
आशा है आपको यह जानकारी उपयोगी लगी होगी। किसी अन्य प्रश्न के लिए बेझिझक पूछें।
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क्या आप मुझे भगवान शिव के विभिन्न रूपों के बारे में और बता सकते हैं?
शिव के प्रतीकों का क्या महत्व है?
महाशिवरात्रि का त्योहार क्यों मनाया जाता है? क्या
आप भगवान शिव से जुड़ी कुछ प्रसिद्ध कहानियों के बारे में बता सकते हैं?
भगवान शिव, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं, जिन्हें महादेव, शंकर, भोलेनाथ, आदि कई नामों से जाना जाता है। वे त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, और शिव) के तीसरे देवता हैं, जो क्रमशः सृजन, पालन और विनाश के प्रतीक हैं। हालांकि, शिव केवल विनाश के देवता नहीं हैं, बल्कि वे परिवर्तन और पुनर्जन्म के भी प्रतीक हैं। वे योग, ध्यान और मोक्ष के देवता भी हैं। शिव का स्वरूप: शिव का स्वरूप अत्यंत जटिल और बहुआयामी है। उन्हें अक्सर नीले गले वाले, तीसरी आँख वाले, जटाओं में सजे, और भस्म से शरीर को रँगे हुए दिखाया जाता है। वे कभी-कभी नंदी नामक बैल पर सवार दिखाई देते हैं।
उनके हाथों में त्रिशूल, डमरू, और कमंडल जैसे विभिन्न प्रतीक होते हैं। त्रिशूल विनाश, डमरू सृजन, और कमंडल ज्ञान का प्रतीक है। शिव के विभिन्न रूप: शिव के कई रूप हैं, जिनमें से प्रत्येक उनके विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करता है। उदाहरण के लिए, अर्धनारीश्वर रूप में वे शक्ति (पार्वती) के साथ एकता का प्रतीक हैं। भैरव रूप में वे भयानक और क्रूर हैं, जबकि अन्य रूपों में वे दयालु और करुणामय हैं। शिव और पार्वती: पार्वती, शिव की पत्नी हैं, जो शक्ति और प्रेम की देवी हैं। उनकी कहानी प्रेम, त्याग, और आध्यात्मिक विकास की एक कथा है। उनके पुत्र गणेश और कार्तिकेय भी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण देवता हैं।
शिव पूजा: शिव की पूजा विभिन्न तरीकों से की जाती है। भक्त उन्हें फूल, फल, दूध, और जल चढ़ाते हैं। शिवलिंग, शिव का एक प्रतीकात्मक रूप, पूजा का केंद्र बिंदु है। महाशिवरात्रि, शिव का एक प्रमुख त्योहार है, जो उनके सम्मान में मनाया जाता है। शिव का महत्व: शिव का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। वे न केवल एक देवता हैं, बल्कि वे एक आदर्श भी हैं। वे हमें जीवन के परिवर्तनों को स्वीकार करने, योग और ध्यान के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने, और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का मार्ग दिखाते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि विनाश आवश्यक है, ताकि नया निर्माण हो सके। उनका जीवन और दर्शन आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं।

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